आयुक्त ने साझा किया इंदौर का अनुभव
दिल्ली :- विश्व बैंक समूह, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA), आर्थिक मामलों के मंत्रालय (MoEA), और एशियाई विकास बैंक (ADB) द्वारा दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में इंदौर नगर निगम के आयुक्त श्री शिवम वर्मा (IAS) और अतिरिक्त आयुक्त श्री अभिलाष मिश्रा (IAS) ने भाग लिया।
इस कार्यशाला में देशभर के विभिन्न शहरों के प्रतिनिधियों ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी विकास, जल संरक्षण, और हरित बुनियादी ढांचे पर चर्चा की और अपने अनुभव साझा किए। कार्यशाला का उद्देश्य देश के शहरों के बीच ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान कर सतत विकास के लिए एक ठोस और स्थायी मॉडल तैयार करना था।
इंदौर का बायोगैस मॉडल:
कार्यशाला में श्री शिवम वर्मा ने इंदौर के बायोगैस मॉडल की सफलता की कहानी साझा की, जिसे प्रतिभागियों ने अत्यधिक सराहा। उन्होंने बताया कि कैसे इंदौर ने जैविक कचरे से बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल का उपयोग किया।
श्री वर्मा ने बताया कि जैविक कचरे का कुशल प्रबंधन: इंदौर में घर-घर से जैविक कचरा एकत्रित कर उसे अलग-अलग करके प्लांट में भेजा जाता है, जिससे संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सके।
ऊर्जा और राजस्व का स्रोत: बायोगैस प्लांट से उत्पादित गैस का उपयोग परिवहन और ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाता है। साथ ही, इससे उत्पन्न जैविक खाद का व्यावसायिक उपयोग होता है, जिससे नगर निगम को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होता है।
सामुदायिक भागीदारी
इंदौर के इस मॉडल की सफलता में नागरिकों की जागरूकता और सामुदायिक सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। श्री वर्मा ने अन्य शहरों को भी इस तरह की परियोजनाएं अपनाने के लिए प्रेरित किया।
अन्य शहरों ने भी साझा किए अनुभव:-
इस कार्यशाला में पिंपरी-चिंचवड़, विशाखापत्तनम, बेंगलुरु और जयपुर सहित कई शहरों के आयुक्तों ने भी अपने-अपने शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और शहरी विकास के लिए अपनाई गई रणनीतियों और सफलताओं पर चर्चा की। पिंपरी-चिंचवड़ के आयुक्त श्री संजय कुलकर्णी ने अपने शहर में PPP मॉडल के जरिए किए गए अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं का विवरण दिया। वहीं, विशाखापत्तनम के आयुक्त श्री पी. संपत ने शहरी ढांचे को विकसित करने के लिए निजी निवेशकों के साथ साझेदारी पर प्रकाश डाला।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अलावा, कार्यशाला में जल संरक्षण, वायु प्रदूषण नियंत्रण, शहरी परिवहन, और हरित बुनियादी ढांचे के विकास पर भी चर्चा की गई। पैनल में शामिल विशेषज्ञों ने इन विषयों पर अपने अनुभव और चुनौतियों को साझा करते हुए शहरों को सतत विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाने के उपायों पर जोर दिया।
मुख्य निष्कर्ष :-
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP): कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि PPP मॉडल शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और शहरी ढांचे के विकास के लिए एक प्रभावी तरीका है। इससे न केवल वित्तीय सहायता मिलती है बल्कि तकनीकी विशेषज्ञता भी प्राप्त होती है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग : कार्यशाला में विश्व बैंक और ADB ने बताया कि वे कैसे तकनीकी सहायता और वित्तीय सहयोग के माध्यम से नगरपालिकाओं को अपनी परियोजनाओं में सहायता कर रहे हैं।
सतत विकास लक्ष्यों के साथ संरेखण: शहरों को अपनी परियोजनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सतत विकास लक्ष्यों के साथ जोड़ने पर जोर दिया गया, ताकि दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
