इन्दौर:- पुलिस थाना विजय नगर के पुलिसकर्मियों द्वारा नितेश जैन, योगेश जैन एवं पड़ोसी गिरीश जाबदे (भाऊ) की झूठी शिकायत पर पति को प्रताड़ित करने से इस बात से मेरे पति को इतना सदमा लगा कि उसी समय थाने में ही पुलिसकर्मियों के सामने मेरे पति को हार्ट अटैक आ गया ।
श्रीमती सविता जैन पति संजय जैन, निवासी प्रकाशचन्द्र सेठी नगर, बडी भमौरी, इदौर बताया उन्हें थाने में जबरदस्ती बैठाने एवं छोड़ने के लिए 20,000/- रूपये रिश्वत लेने के संबंध में वह शिकायत कर रही है। कि उपरोक्त पते का मकान जो कि उनके व मेरे पति के मालिकाना हक का होकर उसकी रजिस्ट्री भी हमारे पास मौजूद है. उक्त मकान उनका परिवार पिछले 40 सालों से निवासरत है। उपरोक्त मकान कच्चा बना हुआ था और दो महीने बाद मेरी पुत्री आशी जैन की शादी होने के कारण उक्त कच्च मकान को तोडकर पक्का बना रहे थे. इसके लिए हमने बैंक से रजिस्ट्री पर 12 लाख रूपयों का लोन भी लिया। हमारे मकान का लगभग 30 प्रतिशत काम भी हो चुका है. इसमें हमारे 5-6 लाख रूपये खर्च हो चुके हैं।
इसी दौरान रिश्तेदार नितेश जैन पिता सरदारमल जैन एवं उनका भाई योगेश जैन आए और कहने लगे कि उक्त मकान का पट्टा हमारे पास है और उक्त मकान हमारा है, यह कह कर मकान का काम रोकने का प्रयास किया। जब हमने मकान का काम रोकने से मना किया तो उन्होंने पुलिस थाना विजय नगर में हमारे विरूद्ध झूठी शिकायत दर्ज करवाई और नितेश और योगेश डायल 100 गाडी से तीन पुलिसकर्मी कुलदीप एवं दो अन्य पुलिसकर्मी आए और मेरे पति की जबरदस्ती थाने ले गये. इसके बाद मैं अपनी बेटी के साथ घर की रजिस्ट्री की कॉपी लेकर थाने पहुंच गई। मैंने थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों को कागज दिखाने की बहुत कोशिश की लेकिन पुलिसकर्मियों ने हमारे कागज देखने से साफ इंकार कर दिया। हमें ज्ञात हुआ है कि विजय नगर थाने के पुलिसकर्मियों ने नितेश जैन एवं योगेश जैन से 1,00,000/- रूपये लेकर हमारे मकान का काम रुकवाया है और मेरे पति को इस प्रकरण में झूठा फंसवाया है। इसके बाद मेरे पति को छोड़ने के लिए पुलिसकर्मी 20,000 /- रूपयों की मांग करने लगे। मजबूरन मैंने मेरी बेटी आशी को घर भेजकर 20,000/- रूपये मंगवाए। इसके बाद पुलिसकर्मी कुलदीप एवं सीमा धाकड द्वारा 20,000/- लेकर मेरे पत्ति को छोडा गया।
मेरे पति को लगभग एक घंटे तक पुलिसकर्मियों ने थाने में जबरदस्ती बैठाये रखा। इस दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा मेरे पति को काफी प्रताडित भी किया गया। अगले दिन हम आवेदन लेकर थाने में गए लेकिन पुलिसकर्मियों द्वारा हमारी शिकायत नहीं सुनी गई और थाने में उपस्थित पुलिसकर्मी सीमा धाकड़ ने हमारे रजिस्ट्री के कागजात देखे बगैर ही जमीन पर फेंक दिये और दोबारा मेरे पति, मुझे और मेरे बच्चों को बंद करने की धमकिया देने लगीं। इस बात से मेरे पति को इतना सदमा लगा कि उसी समय थाने में ही पुलिसकर्मियों के सामने मेरे पति को हार्ट अटैक आ गया और वो वहीं खड़े-खड़े गिर पड़े, लेकिन इससे पुलिसकर्मियों को कोई फर्क नहीं पड़ा उन्होंने मेरे पति को उठाने की कोशिश भी नहीं की। यह घटना दिनाक 12.08.2024 शाम 6 से 7 के बीच की है।
श्रीमती सविता जैन ने बताया कि उनके पति भंडारी हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती हैं। उनके इलाज अब तक हमारा लगभग 1,00,000/- रूपया खर्च हो चुका है और अभी भी मेरे पति की हालत बहुत गंभीर है।
पुलिसकर्मियो के इस अन्याय से त्रस्त हाकर मैंने अपने वकील आशीष शर्मा जी को फोन लगाया और उन्हें उक्त सारी घटना बताई। इसके बाद मेरे वकील आशीष शर्मा जी ने पुलिसकर्मी सीमा धाकड मेडम को फोन लगाया और उनसे बात की, जिसकी रिकॉर्डिंग हमारे पास मौजूद है। वकील साहब की फटकार के बाद पुलिसकर्मी सीमा धाकड ने हमारे 20,000 /- रूपये हमें थाने से आगे बुलवाकर बापस दिलाये।